प्रधानाचार्य जी का सन्देश

Principalशिक्षा मूल है, संस्कृति पुष्प है, ज्ञान फल है। शिक्षा बौद्धिकशक्ति को उद्दीत करती है। शिक्षा वही होती है जो मानव का चरित्र निर्माण कर सके उसे सच्चा मानव बना सके तभी उसमें नैतिक, बौद्धिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक गुणों का विकास कर सके। शिक्षा विद्यार्थी को सद्व्यवहार, शुभ विचार, सदाचार सत्कर्म, आत्म परित्याग तथा आत्म साक्षात्कार का अभ्यास कराने वाली होनी चाहिए। हमारे विद्यालय का मूल मंत्र “ईमानदारी अनुशासन एवं कठिन परिश्रम” HONESTY, DISCIPLINE AND HARD WORK है इन तीन शब्दों को यर्थाथ रूप से जीवन में उतारने वाला विद्यार्थी ही एक सच्चा नागरिक बन सकता है क्योकि जीवन में कर्म प्रधान होता है। कर्म करना मानव का पहला धर्म है।

जीवन में असंभव कुछ भी नहीं होता। विपरीत परिस्थितियों में भी प्रबल इच्छा शक्ति रखने वालों के लिए कुछ भी असम्भव नहीं होता। सफलता उसे ही मिलती है जो सफलता की इच्छा करता है मजबूत इच्छा शक्ति यानी विलपावर विद्यार्थी को किसी उंचाई पर पहुंचा सकती है। हमारा प्रयत्न इसी प्रकार की शिक्षा देकर उत्तम संस्कार देना है। आप सब को मेरी शुभ कामनांए।

श्री प्रेमचन्द्र चौहान
प्रधानाचार्य     


खेल - कूद

प्रतिवर्ष स्वामी अमर देव कृष्ण देव क्रीड़ा प्रतियोगिता करायी जाती है उसमे विभिन्न...

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